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बढ़ता तापमान , घटते जंगल , जलता पर्यावरण

वैक अप कॉल : जंगल और उनमे लगी आग  , वनों की कटाई  , प्रदूषण से  तापमान मे रोज होती बड़त …. इन सभी कारणों की वजह से पर्यावरण मे बदलाव आ रहे है

हमारे वजह से बड़ रही ग्लोबल वार्मिंग और बहुत सारी गलतियों के कारण उत्तराखंड के खूबसूरत जंगलों मे आग लगने की घाटनाए बढ़ती  ही जा रही है । जंगलों मे आग लगने के कारण हवा की Quality खराब हो रही है । आग लगने के कारण हवा मे कार्बन के कण मीलते जा रहे है , और तेज हवा चलने के कारण ये कण ग्लेसियर में जमा हो जा रहे है , इसकी वजह से ग्लेसियर काफी जल्दी पिघल रहे है । 

आकड़ों के मुताबिक 2013 से 2022 तक 23 हेक्टेयर  जंगल आग की चपेट मे आया । यह आग लगने का कारण 95 प्रतिशत मानवीय होता है और कई बार सुखी घास , चीड़ और देवदार के पेड़ों से भी आग लग जाती है । नदियों के सूखने के कारण पानी की कमी होने लगी है और पूरे राज्य में कई जगह पानी की किल्लत हो रही है ।  

पूरे देश भर मे नेता , सेलिब्रिटी , और सोशल इंफ्लुएंकर्स साल में सिर्फ एक बार फोटो और वीडियोज़ के लिए पेड़ लगते हैं, और वो दिन है पर्यावरण दिवस। आज पर्यावरण दिवस है और ऐसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वाइरल हो रही हैं। लेकिन ताज्जुब की बात तो ये है कि जो वृक्षारोपण सभी लोगों को लाइक्स और फॉलोवर्स दिला रहा है, उन पेड़ों की देखभाल करना भी ये सभी लोग जरूरी नहीं समझते हैं। इसमे बात सिर्फ वीआईपी लोगों की ही नहीं है, आम जनता भी सिर्फ प्रशासन को कोसने और बढ़ती गर्मी की शिकायतों तक ही सीमित है। जबकि अगर सभी चाहें तो मिलकर वृक्षारोपण कर प्रकृति का बचाव कर सकते हैं। 

अब समय आ गया है जब उत्तराखंड वासियों को यह समझने की जरूरत है कि प्रकृति ही उत्तराखंड की पहचान है और प्रकृति ही उत्तराखंड को हिमालयन राज्य का दर्जा देती है। और अगर अब पर्यावरण की रक्षा के लिए सही कदम नहीं उठाए गए तो हम उत्तराखंड की पहचान कहीं खो न दें! 

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