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अब जल्द मिलेगा बिजली कटौती से छुटकारा, मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना का ट्रायल शुरू

वर्ष 2008 में मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना चुन्नी गाँव के समीप मधु गंगा में शुरू की गई थी। मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना को सरकार द्वारा शुरू करने का मुख्य कारण है – मधु गंगा के आसपास के 200 गांव में बिजली आपूर्ति करना। जिन गांव में बिजली की कमी है, वहाँ के लिए यह परियोजना बहुत लाभदायक है।  इससे बिजली कटने जैसी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। 

क्या है मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना?

मधु गंगा पर 15 मेगावॉट की मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना आसपास के गांवों की बिजली की पूर्ति करने हेतु बनाया गया है। परियोजना में तीन टर्बाइन लगाई हैं जो पाँच-पाँच मेगावॉट की बिजली का उत्पादन करेंगी। अभी तक बिजली विभाग द्वारा टर्बाइन से ट्रायल भी करवाया गया जिससे 14,000 यूनिट बिजली का उत्पादन किया गया है। विभाग का कहना है कि आने वाले वर्षों में तीनों टर्बाइन को यूपीसीएल के ग्रिड से जोड़ा जाएगा जिसके पश्चात बिजली उत्पादन का काम शुरू होगा। बीते शनिवार और रविवार को 15 मेगावॉट की विद्युत परियोजना तैयार होने के कारण 8000 और 6000 यूनिट बिजली यूपीसीएल के ग्रिड पर भेजी गई है जिसे विभाग ने भविष्य के लिए अच्छे संकेत बताए हैं। अगले वर्ष से मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना से 10.1 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।

विद्युत परियोजना की कितनी है लागत?

2008 में जब मधु गंगा पर मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना का काम शुरू हुआ, तब परियोजना की लागत 208 करोड़ आँकी गई थी। लेकिन 2013 में उत्तराखंड-केदारनाथ आपदा के कारण यह परियोजना क्षतिग्रस्त हो गई। उसके बाद 2016 में जब यह परियोजना फिर से शुरू हुई, तो इसकी लागत 352 करोड़ आँकी गई है। 

कितनी लाभदायक है मद्महेश्वर जल विद्युत परियोजना

इस विद्युत परियोजना से उत्तराखंड के गढ़वाल मण्डल के बहुत से गांव को जैसे कि जनपद रुद्रप्रयाग के कालीमठ घाटी, मद्महेश्वर घाटी, तुंगनाथ घाटी और कालीमठ घाटी के 200 और गांव को फायदा होगा। इससे उन्हें लो वोल्टेज से छुटकारा मिलेगा और 24 घंटे बिजली की सुविधा मिलेगी। 

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