हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेग्युलेशंस 2026 को जनहित के खिलाफ बताते हुए जमकर नारे लगाए। इसके बाद बुद्ध पार्क से एसडीएम कोर्ट तक रैली निकाली गई, जहां उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और यूजीसी को ज्ञापन भेजा गया।
सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने नए नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह नियम संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार और सामाजिक सौहार्द की मूल भावना के विपरीत हैं। उनका आरोप था कि यह व्यवस्था समाज को एकजुट करने के बजाय विभाजन की ओर ले जा रही है।
उत्तराखंड युवा एकता मंच के संयोजक पीयूष जोशी ने कहा कि यूजीसी के नए प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के नाम पर भय, अविश्वास और जातिगत खाई को गहरा करेंगे। वहीं व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप पांडे ने शिक्षा को समाज की नींव बताते हुए कहा कि ऐसे नियम लागू होने से शिक्षण संस्थानों में भेदभाव का माहौल बनेगा, जिसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ेगा।
सुराज सेवा दल के कुमाऊं मंडल अध्यक्ष विशाल शर्मा समेत अन्य वक्ताओं ने भी नियमों को सामाजिक एकता के लिए खतरा बताया। संगठनों ने सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो महापंचायत कर आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।
मीडिया से बातचीत में सुमित हृदयेश ने इसे भाजपा की “बांटने की राजनीति” बताते हुए जनता से जागरूक होने की अपील की।
