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सातताल झील की गहराइयों से सामने आई महाशीर की नई प्रजाति, वैज्ञानिकों में उत्साह

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल स्थित आईसीएआर–केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (CICFR) के वैज्ञानिकों ने सातताल झील में महाशीर मछली की एक नई प्रजाति खोजी है, जिसे टोर साततालेंसिज नाम दिया गया है। ठंडे पानी की मछलियों पर शोध के क्षेत्र में इस खोज को बेहद अहम उपलब्धि माना जा रहा है। वैज्ञानिक इस प्रजाति पर गहन अध्ययन कर रहे हैं और उनके शोध को प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल बायोलॉजी में प्रकाशित करने की मंजूरी भी मिल चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज हिमालयी शीतजल मत्स्य जैव विविधता के वर्गीकरण संबंधी ज्ञान को और व्यापक बनाएगी। इसके साथ ही, यह साइप्रिनिड समूह की मछलियों के क्रमिक विकास तथा उनके भौगोलिक वितरण को समझने में भी उपयोगी साबित होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण संबंधी प्रयासों को भी नई दिशा मिलेगी।

टोर साततालेंसिज की पहचान समेकित वर्गीय तकनीकों के जरिए की गई, जिसमें शरीर की बनावट, पंखों व शल्कों की संरचना, अस्थि संबंधी परीक्षण और माइटोकॉन्ड्रियल जीन (ATPase 6–8) का आणविक विश्लेषण शामिल रहा। इसके कुछ विशिष्ट लक्षण इसे अन्य महाशीर प्रजातियों से अलग बनाते हैं—जैसे निचले जबड़े के नीचे मांसल मध्य लोब का न होना, यू-आकार का आंशिक धूसर निचला ओष्ठ और सामान्य आकार के होंठ।

अब तक यह प्रजाति केवल सातताल झील में ही पाई गई है, इसलिए इसका नाम भी उसी स्थान से प्रेरित है। यह खोज हिमालयी जलीय पारिस्थितिकी और ताजे पानी की जैव विविधता के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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