स्थिति तनावपूर्ण होती देख प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। हालात बिगड़ने की सूचना मिलते ही मनोज कुमार कत्याल और ध्रुव सिंह मर्तोलिया पुलिस व वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। गुस्साए ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेरकर सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही का आरोप लगाया और बाघ के लगातार हमलों को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि हमलावर बाघ को जल्द ही आदमखोर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही उसे पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जाएंगे, संवेदनशील इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे और निगरानी बढ़ाई जाएगी। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया।
करीब एक घंटे चली बातचीत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा कुछ शांत हुआ और उन्होंने अपना विरोध समाप्त करने पर सहमति जताई। देर रात जाम हटाया गया और शव को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। प्रशासन ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दोहराया।
